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प्यार जिंदगी का खुबसूसूरत अहसास

पोस्टेड ओन: 13 May, 2012 जनरल डब्बा में

प्यार जिंदगी का वह खुबसूसूरत अहसास है जिसे हर कोइ महसूस करना चाहता हैं। एक ऐसा पवित्र जस्बाद जो हर रिश्ते की बुनियाद है। इस अहसास को अगर महसूस करों तो मानो जन्नत मिल जाती है, रब तक पहुंचने का यह सबसे आसान तरीका है। सच्चा प्यार और रब दोनों ही बडी मुश्किल से मिलते हैं। प्यार का रिश्ता बड़ा ही अटूट रिश्ता है, जो कुछ पल का नहीं जंम जंमातर का होता है। यह एक पल का नहीं एक साल का नहीं यह रिश्ता तो सदियों का होता है। प्यार किसी से कभी भी हो सकता है। प्यार के अनेक रुप होते है। मां का प्यार भाइ बहन का प्यार दोस्तों का प्यार। सबके लिए प्यार की परिभाषा अलग अलग है। लेकिन किसी ने प्यार में सच्चे दोस्त को पाया तो किसीने दोस्त में सच्चे प्यार को पा लिया। अंत में जीत सच्चे प्यार की ही होती है। सच्चे प्यार की तो लोग मिसाल दिया करते है। लैला मजनू, हीर रांझा, सोनी महीवाल, शाहजहान मुमताज,इनके प्यार के किस्से तो इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षर में लिखे गये थे। इनकी प्यार की ऊंचाइ को छूना सबके बस में नहीं है।
प्यार और सेक्स एक सिक्के के दो पहलू है। यह एक दूसरे के साथ ही चलते है, मगर यह जरुरी नहीं की हर रिश्ते में सेक्स हो, हर वह रिश्ता कामयाब है जो सेक्सु्अल अपील करता हो। किसी भी रिश्ते की बुनियाद प्यार और विश्वास होनी चाहिए नाकि सेक्स जैसे बाहरी जस्बाद, लेकिन आज के जमाने में प्यार के रिश्तों में मिलावट होने लगी है। लोग प्यार के नाम पर सेक्स परोसते है,उनके नजर में प्यार बस सेक्स करने का एक आसान सा जरीया हो गया है।
सेक्स को प्यार के साथ जोड़कर लोग प्यार जैसे पवित्र शब्द को रुसवा करने लगे है। प्यार का अनादर होने लगा है, लेकिन प्यार तो प्यार ही होता है। जंमों के रिश्ते बस पल भर की मौज या जरूरत बनकर रह गये है। आजकल तो हर पल रिश्ते बदलते है। पहले कहा जाता था कि हमारा समाज एक सोया हुआ समाज था, लेकिन अब यह समाज जाग चुका है। लोगों की जरूरत बढ़ गयी है, कपड़ा,रोटी व मकान के साथ साथ लोगों की आम जरूरतों में अब सेक्स भी शामिल हो गया है। जो बातें पहले बंद घरों में होती है अब वह खुले आम बाजारों में होने लगी है। पुराने जमाने की औरतों को कहां जाता था कि अगर वह अपनी पति को खुश नहीं रख पाई तो उनका जीवन व्यर्थ है। इसका क्या मतलब है…..तो क्या अगर वह अपने पति को सेक्सुअली खुश करती है तो ही उनका रिश्ता सफल है वरना नहीं ….अब सीधे औरत से पूछा जाता है कि बिस्तर पर आप अपने पति को कितने अंक देती है…..आज ढोल नगारे बजाकर यह बातें की जाती है…प्यार तो जैसे कहीं खो सा गया है।
आज लोगों को अगर प्यार है तो सिर्फ इंसान के शरीर से नाकि जस्बादों से। प्यार का रिश्ता भुख व हवस का बनकर रह गया है। प्यार तो मन से मन का मिलन है। लेकिन कुछ लोग तन से तन के मिलन को प्यार कहते है। प्यार जैसे चार दिवारों में बंद होकर रह गया है।
किसीके नाम ना बताने की शर्त पर…प्यार की यह कहानी सुनो
एक रिश्ता सो काल्ड प्यार का अगर इसे प्यार कहे तो गलत होगा। नए प्यार का अहसास था जिंदगी बहुत खुबसूरत,रंगीन और सुहानी लग रही थी..हमने साथ में काफी वक्त बिताया, ढेर सारे सपने सजाये साथ मे घुमना फिरना…लगा जैसे मेरे पैर तो जमीन पर ही नहीं है। नई जिंदगी मिल गयी हो जैसे…जीने मरने की कसमे ढेर सारे वादे किये।फिर अचानक उम्मीदें बढने लगी उसकी कामनाओं का सागर गहरा होता गया, प्यार जैसे कहीं खोने सा लगा उसे मुझसे कम मेरे जिस्म से ज्यादा प्यार होने लगा। वह मेरे पास तो आता था लेकिन मेरे लिए नहीं अपनी भुख मिटाने के लिए। मैने तो सुना था प्यार तो दो आत्माओं का मिलन है मगर यह क्या हुआ….यह प्यार नहीं एक सौदा था। तन का सौदा…धीरे धीरे मैं उससे दूर होती गई। बहुत दूर…..मैं पूछती हूं क्या यही प्यार है….मैने तो प्यार किया और उसने सौदा…….
राधा ने भी किशन से प्यार किया था, क्या उसने किशन को पाया? प्यार का दूसरा नाम त्याग, इन्तजार बलिदान और विश्वास है। किशन अंत में रुक्मिणी के ही हुए। इसका यह मतलब नहीं हुआ कि राधा का प्यार सच्चा नहीं था। आज भी लोग राधा किशन की जोडी को ही अमर मानते है और साथ में उन दोनों की ही पूजा करते है। क्योंकि राधा ने कभी किशन को पाने की कोशिश नहीं की। अगर आपका प्यार सच्चा हो तो वह अमर हो जाता है। प्यार देने का नाम है। राधा के जीबन का अर्थ किशन थे। मीरा जो किशन की दीवानी थी। लोगो की इतनी तोहमत लगाने के बाद भी उसके लबो पर सिर्फ नाम होता था तो भगबान श्री कृष्ण का। त्याग और बलिदान की मूरत बनी। अपना सारा जीबन ब्यतित किया किशन के चरणों में। जहर का प्याला भी पिया हंसते हंसते। तो यह क्या प्यार नहीं था?

एक माँ जो अपने बच्चे को नौ महीने पेट में पालती है। इतना दर्द सहती है तो क्या उस ममता में प्यार नहीं है? एक दोस्त जो अपनी दोस्ती के लिए कुछ भी कर जाता है हर दुःख सुख बांटता है तो क्या यह प्यार नहीं है? वह सब सेक्सुअली किसीसे जुडे नहीं है तो क्या वह एक दूजे से प्यार नहीं करते? उन्होंने तो परमात्मा से मिलने का रास्ता बनाया है। हमने यहाँ प्यार के कितने रंग और रूप देखे। प्यार सिर्फ ढाई आखर का एक शब्द नहीं है, इस शब्द में पूरी दुनिया समाई है।

नाम ना बताने के शर्त पर एक और प्यार के अहसास से मिलते है।
वह आया कुछ पल के लिए। जाते जाते ढेर सारा प्यार का अहसास दे गया। एक रात आयी और चली गयी। कितने सपने सजाये लगा के मुझे भी प्यार हो सकता है, मैं भी प्यार के लायक हूं। लेकिन क्या सिर्फ एक ही रात के लिए। मैंने तो उस एक रात में अपनी पूरी दुनिया जिली, एक नयी ज़िन्दगी से मिली। क्या वह प्यार पल भर का ही था ? फिर छा गई काली अँधेरी रात। तंहाइ के बादल फिर मंडराने लगे। दे गया मुझे ज़िन्दगी भर का इंतजार। क्या वह प्यार नहीं था ? मैंने तो प्यार किया था। उसने सिर्फ हवास का रिश्ता बनाया था मुझसे।
हमारे देश में कुछ संस्कार आज भी जिंदा है जिसके बदौलत हम शादी जैसे पबित्र रिश्ते को मानते है। बिदेशो में तो “stay together live together ” का चलन भी है। सेक्सपीयर ने अपने प्यार को अलग अलग रूप में भी दिखाया है. कभी वह रोमियो के जूलियट बने तो कभी……….
प्यार से बस प्यार करो उसे सेक्स के साथ मत जोड़ो। हमारा प्यार जो कहीं बाज़ार में सेक्स के नाम पर नीलाम हो रहा है। हमे उसे ढूंढ लाना है और उसे अपनी मर्य़ादा वापस दिलानी है. तभी यह समाज वापस से एक खुबसूरत संस्कारी और सुन्दर समाज कह लायेगा। जहा लोग प्यार से बस प्यार करेंगे और रिश्तों की इज्ज़त। नाकि उसे खरीदने बाज़ार जायेंगे।



Tags: अन्ना व तिरंगा  

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1 प्रतिक्रिया

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akraktale के द्वारा
May 16, 2012

अग्रवाल जी, मै एक अच्छा शीर्षक देख कर पढने लगा किन्तु कुछ समझ नहीं पाया कभी आपने माँ बेटे के प्यार तो कभी भाई बहन का प्यार इसमें जोड़ दिया और फिर प्यार पर कम और व्याभिचार पर ही ज्यादा लिखा है. मुझे यह भी महसूस होता है की चंद लोगों के या कहूँ युवाओं के कारण आप पुरे समाज को नरक मान रहे हैं. समाज में इतनी गन्दगी नहीं है. हाँ आज इन्टरनेट के कारण अश्लीलता बढ़ी है जो यदि नहीं रोकी गयी तो अवश्य ही आपका लिखा सत्य होने लगेगा.




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